कुछ लम्हों की "अनुभूति"

जिंदगी अनुभवों का गुलदस्ता है ,हर तरह के फूल यहाँ इसे खूबसूरत बनाने के लिए उपलब्ध है ,यादो के ताने बाने से बनी मेरी एक कोशिश है,ये कविताये ,अपने पति को काफी कम उम्र में खो के ,पुनः नया जीवन शुरू करने से ले आज तक के अनुभवों का पिटारा ,आपके नज़रे कर्म का गुज़ारिशंमंद है, आशा है आप इसे मेरे नजरिये से देख और समझ सकेंगे आप सभी की आभारी

" shikha"

Friday, 8 February 2019

मैंने मिलन में  विरह भी देखा
मैंने हृदय में देखि पीर
मैंने देखा एक रांझे को
जिसके दिल में दो दो हीर 

Saturday, 2 February 2019

शिद्दत से नही मुद्दत से नही
क़िस्मत से शिकायत तुम से नही
अहसास नही अल्फ़ाज़ नही
दिल ख़ाली में अहसास नही
ना मेरे हो ना ग़ैर कोई
तुम तोड़ भी दो तो बैर नही
दिल ही तो है वो भी मेरा
और मेरी चीज़ों का कोई मोल नही
Shikhanaari

Monday, 21 January 2019

रुनक झुनक पायल की छमछम
साँसो में एक मौन सी सरगम
नदी ज़िंदगी बहती अविरल
सावन नही यहाँ मगर फिर भी
तनहायी के इस पतझड़ में
ये तेरी मुस्कान है सावन
Shikha Naari✍️🙏

Saturday, 19 January 2019

बिखर रही हूँ लम्हा-लम्हा ,मोती सा चुन लो ना 
तुम मेरे अहसासों से एक ,चादर सी बुन लो ना 
इस चादर में प्रियतम ,वादों के फूल सजाओ 
एक चुटकी सिंदूर माँग में, घूँघट सा मुझे उढाओ
जीवन मेरा हुआ अमावस ,तुम चंदा बन जाओ 
सारी रस्में प्रेम दीप में बाती बना ,जलाओ
एक बार बस अपना कह दो ना फिर चाहे ना आओ
Shikha Naari❤️🙏

मुस्कान पहन लो ओ जज़्बो श्रिंगार करो जज़्बातों का
काफ़िर एक खुदा बना क्या होगा अब मुलाक़ातों का
मैं अश्क़ रोक कर गाऊँगी तुम नृत्य करो अहसासों का
अब झूठा नाटक शुरू करे,ना पूछ हाल हालातों का
🙏shikhanaari

Friday, 18 January 2019

                मैं कच्ची माटी कीं गुड़िया 
               यूँ अनुभव में दिन रात पकी  
                  जब आँसू आए आखो में  
                    तब समझी मैं इंसान 
                       Shikha Naari

नज़र जो तीर होती तो,मुसाफ़िर बच नही पाते
मेरी आँखे तो राहों से कभी ,हटती नही हैं
तेरे इंतज़ार में पलकें भी मेरी ,काफ़िर हुयी है
झपकती हैं ना थकतीं हैं इश्क़ में शातिर हुयी हैं।